जबसे फ़ोन आया था तब से उसकी खुशी देखते ही बन रही थी l वो चाह रही थी कि किसी को खबर ना हो पर उसके आँखो की चमक और उत्साह ना चाहते हुए भी अपनी गवाही दिए जा रहे थे l एक गुलाबीपन था उसके गालों पर जैसा.. नयी नयी नवयुवती में होता है,उसके साथ कुछ कोमल भावनायें जुड़ी हुई थी,शायद l 
ऐसी चहक तो उसने जब देखी थी जब वह शादी करके आई थी,लेकिन शादी के इतने वर्ष बाद और दो बच्चों के बाद.. आज फ़िर वह उतनी ही खुश और गुलाबी दिख रही थी l वह बहुत गौर से देख रहा था उसे..उसमें वही पुरानी सी मासुमियत फ़िर नजर आ रही थी, पर वो उसे ना जाने क्यों खटक रही थी l
वह जल्दी जल्दी सब तैयारियाँ कर रही थी, उसे जो जो पसंद था.. वो याद करके जो बन सकता था.. वह बना रही थी l 
सभी ने उसे कभी इतना खुश नहीं देखा था.. तो उसकी ननद ने पूछ ही लिया.. कौन आ रहा है भाभी..? 
तो उसने बड़ी ही मासुमियत से और उत्साह से जवाब दिया.. मेरा बचपन का दोस्त, मेरा बैस्ट फ़्रैन्ड अनिमेष आ रहा है ,.. वो यही से निकल रहा था और उसकी गाड़ी खराब हो गयी तो वह मिलने आ रहा है, रात हो रही है ना बच्चे भी साथ थे..उसकी गाड़ी कल मिलेगी ठीक होकर, तो मैने उसे आज यही रुकने का बोल दिया l 
वो अपने काम में लग गयी.. पर वह तबसे उसके हर हावभाव पर ही गौर कर रहा था ..आज वह बहुत ही खूबसुरत लग रही थी, बहुत ही करीने से तैयार हुई थी, हमेशा जूडा बनाने वाली.. उसने आज खुले बाल बनाये थे.. और तो और हमेशा गोल बिन्दी लगानेवाली ..आज उसने लम्बी बिन्दी लगायी थी और काजल भी ..सबसे अलहदा जो था, वो यह कि आज उसने अपनी पसंद का रंग पहना था,नीला ..जो वह नापसंद करता था l 
तभी घर की डोरबेल बजी और उसे सुनते ही वह खुशी से बोली.. लगता है कि वे लोग आ गये… कहती हुई उसकी अगवानी के लिये दौड़ गयी.. l
अनिमेष अपने बच्चों के साथ उसके ड्राइँग रुम में खड़ा था.. और वह गौर से उसे ऊपर से लेकर नीचे तक उसके अंदर कुछ विशेष तलाशने की कोशिश कर रहा था, और एक साँवला सा आर्डिनरी सा आदमी देखकर उसे शायद दिल में कुछ सुकून मिला l
इन सबसे बेख़बर…. वह उसके स्वागत सत्कार में लगी हुई, कभी उत्साह, तो कभी शोखी, तो कभी शर्माती सी वह कभी उसके बच्चों, तो कभी उसकी पत्नी के बारे में, तो कभी उसके परिवार के बारे में, तो कभी अपनी बचपन की यादें ताजा करते हुए.. जैसे सब कुछ एक पल में जान लेना चाहती थी और वह सामने बैठा बस दोनों के चेहरे पर आते जाते भावों पर नजरें जमाये कुछ तलाशने की कोशिश कर रहा था l
कुछ देर में ही सब डायनिंग टेबिल पर खाना खाने बैठे तो सभी डिशेज़ देखकर अनिमेष ने मुस्कराते हुये उसकी तरफ़ देखा तो वह.. हँसते हुए बोली- हाँ सब तुम्हारी पसंद का ही बनाया है.. खाके बताओ कैसा बना है?.. 
लेकिन ये सुनते ही दोनों को देखते हुए उसे अंदर ही अंदर कुछ चुभा ..पर उसने कुछ दिखाया नहीं और जल्दी ही खाना खाकर अपने कमरे में चला गया l 
सबको खाना खिलाकर और अपना सारा काम समेटकर  वह भी कुछ देर बाद कमरे में आ गई ..और आते ही अलमारी में कुछ ढूँढने लगी..कुछ देर में ही उसकी आँखें खुशी से चमकने लगी.. शायद जो ढूँढ रही थी मिल गया था ..और वह उसे लेकर आगे बढ़ी तो उसने एक नजर पलँग पर डाली तो देखा वह सो गया था और उसकी चादर बिस्तर से नीचे गिरी हुई थी.. तो वह मुस्करा दी और प्यार से जाकर उसने पहले चादर उठाकर उसे उड़ायी और बोली- मैं ना होती.. तो पता नहीं क्या करेंगे l उसे प्यार से एक नजर देखकर वह अपना काम करने लगी l 
सुबह के चार या पाँच बजे के करीब खटर पटर की आवाज़ सुनकर उसकी नींद टूट गयी.. तो सबसे पहले उसने बिस्तर पर साईड में देखा तो वह नहीं थी.. तो उसकी नजरें आवाज का पीछा करते हुए वहाँ गयी तो देखा वह नीटिंग मशीन पर स्वेटर बुन रही थी और शायद रात भर सोई नहीं थी उसे बनाने के लिए.. पहले तो उसे कुछ समझ नहीं आया.. और फ़िर उनींदा होने की वजह से शायद फ़िर सो गया l 
सुबह जब सोकर उठा तो देखा कि अनिमेष की गाड़ी आ गई थी और उसके जाने की तैयारी चल रही थी.. वह जल्दी जल्दी नाश्ता लगा रही थी टेबिल पर.. और उसे उठा देखकर भागते हुए उसकी चाय देने आ गई l 
सबने मिलकर नाश्ता किया और अनिमेष जाने के लिए सबसे विदा लेने लगा तो वह भागते हुए कमरे में गयी और एक सुन्दर से गिफ़्ट बैग मे.. वह स्वेटर जो उसने रात भर जागकर बुनी थी ले आई.. 
अनिमेष ने पूछा क्या है तो.. उसने कहा कि बच्चो के लिए बनाई हैं.. तो वह चौक गया.. क्या तुमने रात भर जागकर बनायी.. तुम कभी नहीं सुधरोगी.. हैना.. 
तो वह भी हँस दी – हाँ तो ..पहली बार आये हो तो कुछ तो देना ही था उन्हें.. नहीं दे सकती क्या?  
उससे बेख़बर जो उन दोनों को गुस्से से देख रहा था और कुछ गुबार जो उसके अंदर बन रहा था l
अनिमेष तो चला गया ..लेकिन उसके जाने के बाद जो गुबार उसके अंदर बना था वह फ़ूटा ..तो वह उस गुबार के साथ जो बही तो जाके रुकी तो वह उसका मायका था l
दूसरी तरफ अनिमेष अपने बच्चों और पत्नी के साथ उसकी स्वेटर हाथ में लिए सीना चौड़ा करके बड़े गर्व से बताकर हँस रहा था कि हमारी गर्लफ़्रेंड ने रातभर जागकर बनायी है ,सोचो कितना मरती होगी हम पर l
जिस प्रेम के कसीदे पढ़े जाते है… क्या नियति है कि एक 
औरत कि कोमल भावनाओं को ना वह समझ सका जिसे उसकी नजरों ने कभी अपने लिए चुना था.. जो उसका हुआ नहीं.. उसके पूरी मर्यादा के साथ प्यार से दिए उपहार का सम्मान भी ना रख सका और दूसरा वो जिसने उसे खुद चुना था और इतने वर्ष साथ बिताने के बाद और दो बच्चों के बाद उसके समर्पण के बाद भी.. उसकी पूरी मर्यादा के साथ अपने दोस्त के साथ जरा सी खुशी बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसकी ईमानदारी को समझ नहीं पाया l
उधर वह रोती हुई सोच रही थी कि आखिर उसने क्या गलत किया.. वह तो बहुत खुश थी कि आज उससे मिलेगी जिसे उसने कभी चाहा “था” और उसे दिखायेगी कि देखो आज वह कितनी खुश हैं,वह बिल्कुल भी नहीं बदली, उसे कितना अच्छा और उससे कहीं ज्यादा अच्छा जीवनसाथी मिला है l किसी के बच्चे को एक स्वेटर बनाकर देने से क्या हो गया.. उन्हें क्या गलत लगा.. वो तो कितनी लड़कियो के साथ अपने अफ़ेयर के बारे में बताते थे और दो लड़कियां जिनके साथ उनका सीरियस अफ़ेयर था.. आज भी घर आती हैं और अच्छी दोस्त कहकर मिलते हैं.. मैने तो कभी बुरा नहीं माना और ना ही उँगली उठायी और आज इत्तेफ़ाक से यदि मेरा फ़्रैन्ड आ गया तो उसका स्वागत करना खाना खिलाना गलत है l
✍️शालिनी गुप्ता प्रेमकमल 🌸
(स्वरचित) सर्वाधिकार सुरक्षित
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