देखो अस्त हो रहा सूर्य
प्रिये अब तो दर्शन दे दो
भोर से श्रिंगार किये
खड़ी मै चौखट पर
थक कर चूर हो रहा गात ये
प्रिय अब तो दर्शन दे दो
सूर्य अस्त हो गया तो
अन्धकार का पहरा होगा
इस गावँ की अन्धेरी रात मे
कैसे देखूंगी चेहरा तुम्हारा
दिन का आखिरी पहर ढल रहा
प्रिय अब तो दर्शन दे दो।
सूर्य अस्त अब होने को है
नैना तरस रहे है पल-पल
सूर्य संग ये जीवन मेरा
देखो अस्त हो ना जाये
प्रतीक्षा मे खड़ी मै कब से
प्रिय अब तो दर्शन दे दो।
सूर्य अस्त से पूर्व ही
पंछि लौट आये घर को
वृक्षों की शाखायें झूम रही
जोड़ों के कलरव से।
मै अकेली विरहन हूँ
प्रिय अब तो दर्शन दे दो
कविता गुज्जर
