सर्दी का मौसम और सर्द हवाएँ ,
कैसे – कैसे रंग दिखाएँ ।
कोहरे से भरी सुरमई वादियों में ,
बर्फीली हवाएँ कैसे – कैसे सितम ढाएँ !
कोहरे भरी रात का कहर , क्या कहना ! 
सर्द हवाओं का चेहरे को छू – छू कर जाना ।
खुद में खुद और भी सिमट जाना , 
थरथराते हुए मौन चलते जाना , 
वादियों – पहाड़ों में कोहरे का उतरना ,
कोहरे में चुपके से गुम हो जाना , क्या कहना !
अभावों से जूझती ज़िन्दगियों के लिए ,
सर्द हवाओं से जंग जीतने के लिए ।
शुष्क पल्लव और काष्ठ के अलाव जलाना ,
झीनी चादरों के वितान तानना , 
कोहरे भरी रात के सितम , क्या कहना !
सर्द शिशिर की रात ,  कोहरे का साम्राज्य ,
काँपते थरथराते अस्फुट अधरों का आज ,
कुछ भी कह न पाना , अपनी धुन में गुनगुनाना ।
ओढ़ कोहरे की चादर , कोहरे में सिमटना , 
 कोहरे भरी रात की सर्द हवाएँ  , क्या कहना  !
मीरा सक्सेना माध्वी
नई दिल्ली
स्वरचित मौलिक ।
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