सात सुरों के संगम से बनता कोई संगीत।
जीवन में बड़ा महत्व रखता मधुर संगीत।
शिवजी डमरू से निकालते सुन्दर संगीत।
माँ शारदा वीणा से निकालीं मधुर संगीत।
सरस्वती जिस कण्ठ विराजें गाता है गीत।
विद्यामाँ जिस कलम विराजें रचता है गीत।
स्वर लहरियों,वाद्य यंत्रों का मेल है संगीत।
अवसाद मिटा देता है ये सुनिये तो संगीत।
कल कल अविरल बहती सरिता में संगीत।
झर झर बहते झरना से निकले प्रिय संगीत।
कृष्ण के मुरली से निकले बड़ा मधुर संगीत।
शंख ध्वनि से निकलता सुमधुर प्रिय संगीत।
पक्षी के कलरव में वसा है कर्ण प्रिय संगीत।
जल तरंगों से है निकलता मनमोहक संगीत।
गीत और संगीत का उत्सव घर घर होता है।
ढोल मंजीरा ढपली से लेडी संगीत होता है।
ख़ुशी का हर पर्व अधूरा यदि न बजे संगीत।
जीवन के सुख दुःख से जुड़ा रहा ये संगीत।
आपके अधरों से जो स्वर निकले वो संगीत।
हिन्दू के सोलह संस्कारों में रचा बसा संगीत।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
