शीर्षक- “सात समन्दर पार”

आर हो या पार
जुड़ जाते हैं तार ,
सात समंदर पार।
तकनीक की दुनिया ने
कर दिया सब एकसार,
रिश्ते- नाते, तीज-त्यौहार
नैनो का सुख,औ दिल को करार
सब सुलभ हो जाता
जब उर हो जाए बेकरार।
निर्भर तो सब इसपर है
कि आप कितने हैं समझदार।।
सुषमा श्रीवास्तव,मौलिक कृति,सर्वाधिकार सुरक्षित,रुद्रपुर, उत्तराखंड।

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