हमने तो सीखी नहीं साजिश।
पर हमसे तो की गई है साजिश।
सरल जनों को न जीने देती साजिश।
फरेबियों को फलती-फलाती साजिश।
कोई जटिल पहेली होती साजिश।
किताबों में न लिखी होती साजिश।
मायाजाल सी फैली साजिश।
पर दिल से दूर परे ही रहना साजिश।आखिर में जार-जार रूलाती साजिश।
काश भलाई के लिए होती साजिश।
             -चेतना सिंह,पूर्वी चंपारण
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