सर्वप्रथम वँदन है माँ को ,
माँ सरस्वती तुम्हें प्रणाम।
वीणा वादिनी हंस वाहिनी।
भक्तों का माँ करो कल्याण।
मधुर स्वर माँ कंठ में भर दो।
जन-जन तेरा करे गुणगान।।
बसंत पँचमी की यह वेला।
बन जाए भक्तों की आन।।
वँदन करूँ मैं माँ सरस्वती।
यश कीर्ति का दे वरदान।।
श्रद्धा पुष्प अर्पण चरणों में
बारंबार माँ तुम्हें प्रणाम।।
सर्वप्रथम वंदन है माँ को ,
माँ सरस्वती तुम्हें प्रणाम।।”
अम्बिका झा ✍️
