गम में भी थोड़ा मुस्कुराते चलो,
समझौता गमों से करते चलो,
खुशी के पीछे मत भाग नादान,
बस जिंदगी को तुम जीते चलो।
यह जीवन है बहता ही रहेगा,
चट्टानों से ठोकर खाता ही रहेगा,
आंधियां भी चलेंगी मुश्किलों की,
कांटो के बीच रास्ता निकालते चलो।
कौन यहां जिसे कोई गम नहीं,
दर्द आंखों से किसका बहा नहीं,
छेड़ो मन पर नया कोई साज,
होंठों पर नवगीत गुनगुनाते चलो।
क्षणभंगुर है जीवन देर ना कर,
मिथ्या अपने पर गुरुर ना कर,
जो बांट सको तो थोड़ी खुशी बांटो,
अंधेरे मन में दीपक जलाते चलो।
स्वरचित रचना
रंजना लता
समस्तीपुर, बिहार
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *