सन् 2021, की शुरुआत दुनिया के हर शख्स के लिए एक उम्मीद के साथ हुई थी। 2020, जब पूरे विश्व के लिए एक श्राप बनकर आया था तब लोगों को उम्मीद थी कि 2021, उन्हें इस कोरोनावायरस नामक श्राप से मुक्त कराएगा।
हालांकि 2021, समापन की ओर अग्रसर है, और अभी भी नये-नये वेरिएंट एक भयानक स्थिति उत्पन्न करने में लगे हुए हैं । किन्तु फिर भी लोगों में इस वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा हो गई है। लोग अब अपनी सेहत की तरफ ज़्यादा ध्यान देने लगे हैं। अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में लगे हैं। ये एक साकारात्मक कदम है। जो कोरोनावायरस नामक जंजीर से ना केवल हमें मुक्त कराएगा, अपितु हमारे स्वस्थ जीवन का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
खैर, ये तो समस्त विश्व की बात है। मेरे लिए 2021, एक बहुत ही महत्वपूर्ण साल रहा। इस साल मैंने अपने अंदर के लेखक को पहचानना आरंभ किया। यूं ही खाली समय में कहानियां पढ़ती थी। और पढ़ते-पढ़ते एक दिन नज़र प्रतिलिपि के ऐप पर गयी। उसे डाउनलोड किया और कहानियां पढ़नी शुरू करी।
फिर अचानक नज़र प्रतियोगिताओं पर पड़ी। लगा कि कुछ लिखना चाहिए। मन के भावों को बाहर लाना चाहिए। तो उस मंच पर आयोजित बहुत सी प्रतियोगिताओं में भाग लिया। और लगभग हर प्रतियोगिता में मेरा नाम आया। पर होंसला तब बड़ा जब मेरी द्वारा लिखी प्रेम कहानी को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।
बस तब से ये सिलसिला निरंतर अपनी गति पकड़ता गया। मैं लिखती चली गई। लोग जुड़ते चले गए। बहुत बार डायरी लेखन प्रतियोगिता में नाम आया। एक अन्य कहानी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। और देखते ही देखते मेरे फॉलोअर्स भी बढ़ने लगे और 500 तक पहुंच गये।
इस मंच के द्वारा अन्य लेखन मंचों से भी रूबरू होने का मौका मिला। रश्मिरथी मंच से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनकी नवंबर ई-पत्रिका में मेरी कहानी छपी। पढ़कर अत्यंत खुशी महसूस हुई। इसके अलावा रश्मिरथी की दैनिक प्रतियोगिता में भी एक बार प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
दिसंबर आते-आते मैं भी एक लेखिका के रूप में अपनी छोटी सी पहचान बनाने में कामयाब हो गयी। अप्रैल 2021 से शुरू हुआ ये सफर आज बचपन से निकल कर यौवन में प्रवेश करने वाला है। इस सफ़र में बहुत से उतार चढ़ाव भी देखे। मायूसी भी बहुत हुई। पर अंत में एक लेखक की कलम ने हार नहीं मानी। मेरे साथ इस सफ़र में बहुत से नये साथी जुड़े। उनसे बहुत ज्ञानवर्धक जानकारियां प्राप्त हुईं। सबने अपार स्नेह दिया।
यूं तो पारिवारिक रूप से ये साल इतनी बड़ी उपलब्धियों का साल नहीं रहा। आशा से ज़्यादा निराशा हाथ लगी। पर व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए 2021 उपलब्धियों से भरा साल था। पिछले पंद्रह सालों से जो पहचान मैं खो चुकी थी, जिस पहचान को वापस पाने के लिए मैं लालायित थी, 2021 ने मुझे मेरी वो पहचान वापस दे दी। आस्था सिंघल,एक पत्नी है, एक बहू है, एक मां है, पर आस्था स्वयं क्या है? पंद्रह साल से यही सोच रही थी। क्योंकि पंद्रह साल पहले आस्था एक सफल शिक्षिका थी। पर वो पहचान खत्म करनी पड़ी। तो अब आस्था क्या है?
इसका जवाब सन् 2021 ने दिया, आस्था एक लेखिका है।
🙏
लेखिका
आस्था सिंघल
