सच, मैं यह सच कह रहा हूँ ,
वह मासूम चेहरा,
जो खड़ा है मेरे सामने,
कल वह उस छत के नीचे,
कुलबुला रहा था।

मेरी तब गलती यह थी,
कि मैंने दो आत्माओं को मिलाया था,
मगर आज वही आत्मा,
यहाँ क्यों खामोश है ?
जब कल वह मांगती थी मुझसे,
याचना में अपना जीवन।

मैंने देखी थी अपनी आँखों से,
उस चेहरे पर एक बेबसी,
शायद वह सब तरफ से निराश था,
शायद ऐसा ही आज भी हो,
कि रह गया हो अधूरा,
उसका कोई सपना फिर से।

इसलिए बेचैन है वह आज भी,
इसी पूरी उम्मीद से,
कि उसका सपना साकार हो,
सच, मैं यह सच कह रहा हूँ।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

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Gurudeen Verma

By Gurudeen Verma

एक शिक्षक एवं साहित्यकार(तहसील एवं जिला- बारां, राजस्थान) पोस्टेड स्कूल- राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नांदिया, तहसील- पिण्डवाड़ा, जिला- सिरोही(राजस्थान) 2900 से ज्यादा रचनायें

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