संत का उदय अंत्योदय उन्नति उत्कर्ष मार्ग प्रशस्त आश विश्वास।।
निःस्वार्थ निर्विकार सम भाव धरा धारा प्रवाह मानव मानता सांस्कार अतीत वर्तमान।। 
जीवन झंझवत तूफां दिवस संध्या निशा प्रभात प्रेम शांति उत्साह प्रेरणा प्रेरक उत्साह।।
पल पल बदलते युग में स्थिर शांत मधुर मुस्कान व्यवहार शौर्य नव कमल प्रभास ।।
सीमित संकुचित होती मानवता बृहद जीवन दर्शन  युग जागरण वरदान।।
शत्र शात्र सार मानव मार्याद मूल्यों
रिश्ता नाता संबंध समाज।।
निर्माण यज्ञ ऋषि मनीषि की आहुति सत्य संसार मातु पिता सेवा धर्म मर्म पितर तर्पण संस्कृति सांस्कार आचरण व्यवहार।।
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश।।
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