श्री ब्रह्मा जी के काया से जन्मे,
प्रभु श्री चित्रगुप्त जी भगवान।
दिव्य ज्योति लिए ये अवतरित,
ब्रह्मज्ञानी हैं आराध्यदेव महान।
कलम कृपाण दोउ हाथ में सोहे,
दुनिया में सब से बड़े बुद्धिमान।
कायस्थ कुलों के हैं संस्थापक,
सब के उरतल में हैं विराजमान।
यम के प्रमुख सचिव सहायक,
जीवों के कर्मो पर रखते ध्यान।
पाप पुण्य का लेखा रखते यह,
दण्ड पुरस्कार का करें विधान।
यमराज भी इनकी बात मानते,
लिखते कर्म फल यह भगवान।
यही काटते हैं आरसी सब की,
यमदूत तभी चलते लेने प्राण।
इनसे कभी कोई चूक न होती,
ऐसे ज्ञानी लेखक यह विद्वान।
परमपिता ब्रह्मा जी के अंश हैं,
आराध्यदेव चित्रगुप्त भगवान।
सूर्यपुत्री दक्षिणा नंदिनी माता,
व एरावती शोभावती हैं प्राण।
दोनों पत्नियाँ सौभाग्यवती हैं,
जिन्हें मिले चित्रगुप्त भगवान।
हम कायस्थ हैं उन्हीं के वंशज,
पूर्वज हैं श्री चित्रगुप्त भगवान।
एक पत्नी से चार पुत्र है जन्मे,
चारो बड़े ज्ञानी एवं बड़े महान।
एक पत्नी से आठ पुत्र हैं जन्मे,
सब के सब दुर्लभ और विद्वान।
इन बारह पुत्रों से यह वंश बढ़ा,
कायस्थ राज्य साम्राज्य महान।
सृष्टि के प्रथम न्यायाधीश हैं ये,
धर्मराज श्री चित्रगुप्त भगवान।
देवियों-देवताओं के प्रिय बहुत,
न्यायप्रिय श्रीचित्रगुप्त भगवान।
मन्त्रों में भी एक मन्त्र है इनका,
महिमा लिखी है इन वेद पुराण।
स्वर्ग नरक में किसे क्या मिलना,
निर्णय का हक रखें ये भगवान।
सनातनदेव संयमनीपुरी निवासी,
पावन प्राकट्यपर्व है बड़ा महान।
जिनकी जयंती हम आज मनाते,
यही पूज्यनीय चित्रगुप्त भगवान।
आशीर्वाद हमें दें प्रभु सद्बुद्धि दें,
इस जीवन के रक्षा का दें वरदान।
कटे कष्ट कोरोना का अब स्वामी,
यह कृपा बरसायें हे कृपानिधान।
कायस्थ शिरोमणि हे जग स्वामी,
शत-2 नमन,कोटि कोटि प्रणाम।
जय चित्रगुप्त यमेश तव,शरणागतम शरणागतम।
जय पूज्य पद पद्मेश तव,शरणागतम शरणागतम।
जय देव देव दया निधे,जय दीनबंधु कृपा निधे।
कर्मेश तव धर्मेश तव, शरणागतम शरणागतम।
रचनाकार :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
