“गौरी और महादेव के बीच किसी बात को लेकर बहस हो जाती है। महादेव नाराज हो जाते हैं।
गौरी हर प्रयास कर के थक जातीं हैं। महादेव नहीं मानते हैं।
एक दिन महादेव ने गौरी से कहा सरोवर में एक कमल का फूल खिला है। हमें उसी पुष्प से आज पूजन करना है।
गौरी ने सोचा ये सही समय है। हम महादेव को प्रसन्न कर सकते हैं।
गौरी धार के किनारे-किनारे गयी। हर जगह ढूंढ लिया परन्तु गौरी को एक भी मल्लाह नहीं मिला।
महादेव मल्लाह के वेश में नदी में नाव खेव रहे थै।

गौरी ने जैसे ही देखा, उन्होंने मल्लाह से कहा! हमें सरोवर के बीच में जो कमल का पुष्प है वह हमें दे दो। उसके बदले तुम्हें जितने भी पैसे चाहिएं ले लो। जल्दी से दे दो बहुत देर हो रही है।
महादेव इंतजार कर रहे होंगे।
मल्लाह ने कहा।  तुम को चाहिए तो आ जाओ हमारे साथ नाव में बैठकर, नौका विहार पर चलो। हम तुम को ऐसे ही दे देते हैं। हमें पैसे की कोई आवश्यकता नहीं।

गौरी ने कहती हैं।
नहीं हमें पैसे से ही पुष्प चाहिए। नाव में नहीं बैठने के लिए वक्त नहीं है। मल्लाह ने कहा नाव में आकर कमल के पुष्प लेकर जाओ।
गौरी जैसे ही कमल के पुष्प लेने लगी, मल्लाह ने उनका आंचल पकड़ लिया। गौरी के चेहरे को छूने का प्रयास करता है।
गौरी कहती हैं। आप को यह शोभा नहीं देता।
जिसका जो कार्य है वही करना चाहिए।
इस तरह किसी के साथ अभद्रता पुर्ण व्यवहार आप क्यों कर रहे।
मल्लाह कहता है। गौरी आप तो बूरा मान गई। मैं तो मज़ाक कर रहा था यह लिजिए पुष्प‌

तभी गौरी कमल के पुष्प लेकर वहां से लजाकर भाग गयी।
रास्ते में आते आते ही गौरी के माथे पर सींग उग आया। वो अपने सर के पल्लू से जितना ढकने का प्रयास करती हैं। उतना ही सींग का आकार बढ़ता जाता।
गौरी जैसे ही आंगन में आती हैं। उनके माथे पर सींग देख कर महादेव कहते हैं! गौरी  आपने किसी के साथ मजाक मस्ती की है। ये सींग कैसे उग आए? आपके माथे पर।😅
हम दिन भर घर से बाहर रहते हैं। आप किसी और के  साथ  मस्ती मज़ाक  करती  हैं। आप के माथे पर छिनारि के चिन्ह कैसे उग आए हैं।
गौरी मांथे पर उगे सींग को अपने आंचल से ढ़कने की नाकाम कोशिश करती हैं।😅
कहती हैं, महादेव आपको को सब ज्ञात है।आप अपना भाभट समेट लीजिए। हमें पता है आप का प्रपंच है। हमने मल्लाह के साथ किसी भी प्रकार का कोई मस्ती मजाक नहीं किया है। उसने प्रयास किया और मैं भाग आयी।
हम जो भी कहते हैं आपसे, आप हमारे ही साथ करते हैं। मैं माफी मांग रही आपसे। जो जैसा है उसे वैसे ही रहने दीजिए।
महादेव कहते हैं। ठीक है जैसा आप कहें। अगर
सामने वाले के मजाक में  आप  चुप  रहती हैं । उसे पलटकर जवाब नहीं देती
तो, उस बात में आपकी सहमति मानी जाएगी।उसके पाप और पुण्य में आप बराबर की हिस्सेदार होंगी।
गौरी कहती हैं ऐसे तो संसार में रहना मुश्किल हो जाएगा। आप इस चिन्ह को हटा लो।
महादेव कहते हैं ठीक ह परन्तु अब इस चिन्ह को क्या करूं?
गौरी कहतीं हैं। आप  गाय  बैल  को  सींग  और कुत्ते  बिल्ली  को  पूंछ  दे दीजिए।
महादेव  ने  ऐसा  ही  किया।।”

क्रमशः
अम्बिका झा ✍️

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2 thought on ““श्रावण माह व्रत कथा” भाग-१८”
  1. लाजवाब बहुत खूब लिखा है आपने , बेहतरीन बेमिसाल शानदार प्रस्तुति अद्भुत सृजन 🌺🌺🌺👌👌👌💞💞💞👌👌💐💐💐👌👌👌❣️❣️🥀👌👌👌🥀🥀🥀👌👌👌🌺🌺🌺👌👌👌

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