हर आंख नम है दिल भरा है।
 एक सपूत असमय में चला गया ।।
लाखों पर भारी एक शेर कोई जाता है ऐसे जैसे तुम चले गए।। 
 अर्धांगिनी ने साथ निभाया जो वचन दिए ।
वह पूरे किए कोई जाता है ऐसे
जैसे तुम चले गए।। 
थे साथी साथ में वह भी प्रयाण कर गए कोई जाता है ऐसे जैसे तुम चले गए। 
माँ भारती का आँचल लहूलुहान हुआ ऐसा  वियोग कोई करता है क्या जैसा तुम कर गए।।
विधि का विधान क़ूर कैसी अनहोनी विमान की त्रासदी ने छीने रणबाँकुरे। 
नापते धरती आकाश हो गए अनंत में विलीन गाएँगे यशगीत शहीदों की गाथा के।। 
विनम्र श्रद्धांजलि 
डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर
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