रूढ़िवादी, अंधविश्वास और दकियानूसी विचारों से ओत-प्रोत हमारे समाज के लोग,लड़कियों के चरित्र को  मापने के लिये एक अद्भुत दृष्टिकोण रखते हैं, जिसके द्वारा वे मात्र लड़कियों के लिबास से ही उनके पूरे चरित्र का बख़ान करने का हुनर जानते हैं…..

अफसोस…..पढ़े लिखे गंवारों से भरा यह समाज,
चरित्र जैसे सुन्दर व विस्तृत गुण को एक बहुत ही ओछी मानसिकता में सीमित कर देता है…..
लड़कियों को उनकी शराफत का लाइसेंस,लड़कियों को  ये इसी पैरामीटर पर माप कर देते हैं…..जैसै…..
लड़की ने अग़र सलवार,कमीज़ प़हन रखा है और दुपट्टे को सलीके से लगा रखा है तो उस लड़की के माथे पर शराफत का टैग चिपका दिया जाता है और अगर लड़की रास्ते में नज़रें झुका कर चलती है,बात करने का ल़हजा़ शान्त और विनम्र स्वभाव की है…..फिर तो ये अपने आवारा,नाकारा, निकम्मे लड़के के लिये जो 
(सारा दिन bike में अपने पिता की मेहनत की कमाई पेट्रोल में फूँक कर गलियों के चक्कर काटता है और अक्सर girls college के सामने लड़कियों को ताड़ता नज़र आता है) 
मुँह उठाकर उस लड़की के घर उसका हाथ मांगनें पहुँच जायेंगे और तो बड़ी बेशर्मी के साथ जहेज़ की मांग भी कर देंगे….. हाय ये समाज…..
अब आती हैं वे लड़कियाँ जो पारम्परिक लिबास से हट कर कपड़े पहनती हैं,इन्हें समाज़ स्वीकारने में थोड़ा समय लेता है या इनके शराफत के लाइसेंस पर शिकायत की स्याही पुती होती है…..
अब आती हैं क्रान्तिकारी प्रविर्ती की लड़कियाँ, वे लड़कियाँ जो इस समाज के बनाये नियमों का पालन नहीं करतीं, ये अपनी शर्तों पर अपना जीवन व्यतीत करती हैं, इनके कपड़े चाहे जैसे भी हो इनके खि़लाफ समाज की बग़ावत का कारण है इनकी व्यापक और स्वतंत्र विचार शक्ति जो समाज की बेबुनियाद नियमों को रौंद के रख देती हैं और जिसे हमारा समाज बर्दाश्त नहीं कर पाता और इन लड़कियों को नहीं मिलता समाज में,शराफत का लाइसेंस…..
हमारा काबिल समाज इस शराफत के लाइसेंस को रद्द करने का हुनर भी बखूबी जानता है…..ऐसी लड़कियाँ जो राह चलते लड़कों से बात करती हैं या जिनकी दोस्ती लड़कों से ज्यादा है,ये शाम में अपनी छत पर आकर फोन पे बात करती हैं तो आस-पड़ोस के लोग इन्हें शरीफ क़हने से कतराते हैं…..
और सबसे बड़ा अनर्थ तो एक लड़की तब करती है जब वह किसी लड़के से प्रेम कर बैठती है…..उस समय उसकी शराफत का लाइसेंस बेशरम रंग की स्याही से ओत-प्रोत हो जाता है…..अब ये स्याही तो नहीं मिटती परन्तु अग़र लड़का,लड़की के घर वालों को पसन्द है तो विवाह के पश्चात नया लाइसेंस मिलने की सम्भावना होती है…..लेकिन उस समय एक लड़की का शराफत का लाइसेंस जीवन भर के लिये निरस्त कर दिया जाता है,जब वह लड़की किसी दूसरे धर्म के लड़के से प्रेम कर उससे विवाह कर लेती है फिर तो उसे जीवन भर ताने ही सुनने मिलते हैं…..
बड़े अफसोस की बात है कि एक लड़की की शिक्षा,शिष्टाचार को छोड़ हमारा समाज ऐसी दकियानूसी मानसिकता को प्रधानता देता है और हर बार लड़कियों की शराफत पर उंगली उठाता है और इससे भी ज्यादा शर्मनाक व दुःख की बात यह है कि…..हमारे अपने भी इसी रूढ़िवादी समाज का एक अभिन्न अंग हैं…..।
सना सिद्दीकी
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