अनजाने राही कमाल करते हैं,
जब भी मिलते हैं बबाल करते हैं।
होंठ खामोश इजाजत नही हिलने की,
उठती गिरती नजरों पे शान करते हैं।
कुछ होते हैं सरफिरे , वे अक्ल फिजूल से,
कुछ होते हैं सलीके से सबाल करते हैं।
वक्त बे वक्त दे देते हैं दिल पर दस्तक,
कहाँ वो पाबंदियों का ख्याल करते हैं।
दिमाग को खबर नही होती बड़े आहिस्ता,
दिल मे उतरके जज्बों के ढाल करते हैं।
कुछ इस कद्र दीवाने हैं यह अपनी दुनिया में,
दुनिया के उसूल जलाकर दिल की राहों में मशाल करते हैं।
जमाने भरके गुल उनकी मासूमियत पर शर्मिंदा हैं,
फीके हैं रंग शर्म से जब वो गालों को गुलाल करते हैं।
हैं अनजाने राही चन्द पल में मिलके बिछड़ जातेहैं,
पर उम्र भर दिल की दुनिया में मकाम करते हैं।
सोते जागते रहते जहन पर तारी,
कुछ इस तरह से दिल से पहचान करते हैं।
उम्र छोटी होती हैं इनसे बनी दास्तानों की,
पर क्यों बिछड़े, दिल के अहसास यही मलाल करते हैं।
अन्जू दीक्षित,
बदायूँ,
उत्तर प्रदेश।
