“अच्छा! यह जान कर दिल को तसल्ली मिली पर…हम आपके हैं कौन.?”
सौरभ मजाकिया लहजे में बोला!
“शैली- वी आर जस्ट अ फ्रैंड! सुरभी ने भी हामी भरी!
सौरभ-
” माशाअल्लाह! यही तो मैं सुनना चाहता था…!”
” माय सेल्फ सौरभ मेहता.. नाईस टू मीट यू!”
सौरभ ने हाथ आगे बढाया!
सुरभी -“जी धन्यवाद!”
उसने हाथ जोड़ लिया!
सुरभी- “मैं देख रहा हूँ तभी से आपके चेहरे पर हवा ईयां उड़ रही है.. वैसे डरना मुझे चाहिए.. कहाँ जा रही हैं आप दोनों?”
मेरठ!
शैली ने संक्षिप्त उत्तर दिया और विंडो से बाहर देखने लगी!
“अच्छा! तो आपने दूसरी सीट पर कब्जा किया है..?”
कबसे हैं आप इस प्रोफेशन में..?”
सौरभ ने शैली की खींचाई की.!
सुरभी- “अभी तो हम प्रोफेशन से बहुत दूर हैं..मेरठ जा रहे हैं हम दोनों कजन की शादी में.. हम दोनों वहीं पढते हैं..!
सुरभी-“मेरा एम बी ए फायनल है और मेरा सी ए …शैली बोल पड़ी!”
सौरभ-“अच्छा! अब हमारा स्टेशन आ गया आप कहें तो आपके गंतव्य तक छोड़ दूं.?”
“नो थैंक्स! अंकल आएंगे हमें पीक करने!”
“तो हो जाए एक 𝗸𝗶𝘀𝘀 𝗺𝗲.!”
सौरभ ने टाफी दिखाते हुए कहा जिस पर 𝐤𝐢𝐬𝐬 𝐦𝐞 लिखा था!
आप बहुत फ्लर्टी हैं.. दीजिए.. ! दोनों सहेलियों ने 𝗸𝗶𝘀𝘀 𝗺𝗲 टाफी खाई!
अगले स्टाप पर तीनों उतरे …सौरभ ने बाय किया और चल दिया! सुरभी मुड़ -मुड़ कर देखती रही!
“उसे बार -बार सौरभ की याद आ रही थी.. कितना बिंदास लड़का था..क्यूँ ख्यालों में आने लगा है वो..पता नहीं फिर कब मिलेगा.?”
लगातार फोन रिंग हो रहा था और सुरभी बेखबर हो चले जा रही थी.!
शैली-“फोन देख अपना..!”
देखा तो अंकल जी का फोन था.. “उनका मैसेज भी आ गया था.. “मंदिर पर रुको .. अभी ट्रैफिक जाम है थोड़ी देर लगेगी!”
सुरभी और शैली ने मंदिर में भगवान का दर्शन किया प्रसाद लिया तबतक अंकल भी आ गए..अंकल के साथ दोनों उनके उनके घर चली गई.!
चलो हमारे पापा से मिलवाते हैं! अंकल जी के साथ सुरभी और शैली ने दादाजी का चरण स्पर्श किया!
बड़े दादाजी का भरा पूरा परिवार था! जीवन संगिनी दादीजी के साथ उनके तीन बेटे थे और बहुएं भी आ गईं थीं! क्रमशः नीलू भाभी, उमा भाभी और रानी भाभी..! तीनों भाभियों के प्यारे बच्चे भी थे! एकमात्र बेटी अर्चना दी थीं जिनकी शादी में सुरभी शैली का आना हुआ था! था! स्नानादि के उपरांत तीनों बहु बेटे दादाजी जी का चरणस्पर्श करते! दादाजी शिक्षणकार्य से सेवा निवृत्त हो गए थे! भगवन्नाम के साथ- साथ समाज सेवा कार्य से भी जुड़े हुए थे! उस परिवार में सर्वोच्च संपदा अनुशासन और संस्कार हीं था!
सुरभी शैली ने इस परिवार से बहुत कुछ अच्छी बातें सीख ली थी!
आज बारात आने वाली थी! सुरभी और शैली ने मैरुन कलर का लहंगा पहना.. लहंगे से मैच करता हुआ नेकलेस पहना और हलका मेकअप भी किया.. दोनों ही आसमान से उतरी परी नजर आ रही थी । सुरभी को बरबस सौरभ याद आ रहा था.!
काश! कभी फिर वो मिलता.! सुरभी मन ही मन बुदबुदाई!
कौन सा मंत्र पढ़ रही है तु.?अर्चना दी ने पूछा!
सौरभ का..! अचकचाते हुए सुरभी बोल पड़ी!
क्या मतलब.. कौन है ये?
“अरे दी!…. शैली ने ट्रेन के सफर की पूरी दास्ताँ सुनाई दी!”
तभी से महारानी उसी के ख्यालों में डूबी हुई है!
“ओ..अच्छा! यानी सुरभी को पसंद आ गया है..?”अर्चना दी सधे हुए शब्दों में बोली!
हाँ दी.. शैली ने समर्थन किया!
सुरभी सबसे बेखबर अपने ही खयालों में खोई हुई थी!
अर्चना-” अभी तो सब्र करो महारानी,.. शादी हमारी है आज.. और बिदा होना तुम चाहती हो?”
“अरे! तुम सब बात करने में मशगूल हो.. आरती की थाली कब सजेगी?” दादी के शब्दों ने सबको चौंका दिया!
दोनों जल्दी से उठी और आरती की थाली सजा कर रख दी!
बहनों की हंसी-ठिठोली में दिन बीतने का पता ही नहीं चला!
दादाजी ने बारात का भव्य स्वागत किया.! जयमाल आरम्भ हुआ! सबकी नजरें वर कन्या पर टिकी थी! सुरभी शैली ने बहन की पूरी भुमिका अदा की! दोनों पक्षों के परिवारिक सदस्यों ने वर वधू को आशीर्वाद दिया!
” शैली.. मैं वाशरूम जा रही हूँ.. अभी आई!” सुरभी बोली!
“शैली-ओके! जल्दी आना!”
सुरभी ने कोरी डोर पार किया सीढ़ियां चढती हुई उपर के वाशरूम में चली गई!
वापस सीढीयों से उतरते हुए सुरभी का दुपट्टा ग्रील से उलझ गया! सुरभी दुपट्टा निकालने की कोशिश कर रही थी कि सहसा किसी की आवाज सुन कर चौंक गईं!
“देखना यार सीढ़ी बहुत साफ्ट है कहीं स्लीप न कर जाना!” एक लड़के ने कहा!
स्लीप होने के लिए और भी कोई है यहाँ.. ! हेल्प मी गाड.. ये आवाज सौरभ की थी.!. पर सुरभी किसी का चेहरा नहीं देख पाई थी! सुरभी की धड़कन तेज हो गई थी! क्या सच में यहाँ सौरभ आया है.? पर अब तक दिखा क्यूँ नहीं? सुरभी की नजरें सौरभ को ढुंढने लगी! उसने जल्दी से अपना दुपट्टा संभाला और पुनः उपर के कमरे में चली गई!
“कुछ लड़के दादाजी के कमरे में थे! सुरभी उन्हें देख नहीं पाई पर उनमें से किसी एक की आवाज सौरभ जैसे ही थी!”
सुरभी.. यहाँ अकेले क्या कर रही है तू.?” नीलू भाभी की आवाज सुन सुरभी चौंक गई!
क्रमशः-
