बेटियाँ तो शक्ति हैं वो नहीं बोझ हैं।
ये किसी की नहीं आप की सोच हैं।
मेरी नजर में तो ये बेटियाँ हैं परी।
कीमती हैं बहुत जग में भी बड़ी।
ये तो अनमोल हैं हरेक की जान हैं।
दो घरों की यही तो एक वो शान हैं।
शक्ति को मारो ना यार पैदा होने दो।
इनको पालो पोशों एवं बड़ा होने दो।
खेलने कूदने दो और समझ होने दो।
घर गृहस्थी में भी तो निपुण होने दो।
भेजो स्कूल इनको पढ़ाओ भी बहुत।
इनके जीवन संवारो व बढ़ाओ बहुत।
इनको काबिल बनाओ भविष्य के लिए।
इनकी सेवाएं देखो घर व वतन के लिए।
एक पिता की तरह फिर करो हाथ पीला।
आँखें नम होंगी जब आए विदा की बेला।
बच्चों को पालना और ढ़ंग से पढ़ाना उन्हें।
ये वो यज्ञ है जीवन में सब कर न पाते इन्हें।
गर्व करिये कि प्रभु ने दी है बेटी आप को।
ये जरुरी नहीं मिलें ये बेटियाँ हर बाप को।
अब तक जो घर संवारा था रह के यहाँ।
वो संवारेगी मायके से ससुराल जा वहाँ।
बेटियाँ ही हैं जो दोनों जगह की लाज हैं।
पिता की हैं सिरमौर तो पति की ताज हैं।
इनको सम्मान दो देवियों जैसे पूजा करो।
नवरात में ही ना केवल इनकी पूजा करो।
आज की बेटी ही तो कल की ये होगी माँ।
ये बहन हैं,बुआ हैं,मौसी भी एवं नानी माँ।
इनको पालोगे नहीं तो ये रिश्ता कहाँ पाओगे।
कहाँ पाओगे चाची,बड़ी मम्मी और दादी माँ।
रक्षा बंधन के दिन फिर कहाँ से लाओ गे।
क्या पड़ोसी के घर जा राखी बंधवाओ गे।
यज्ञ कभी होता नहीं पूरा कोई जोड़ी बिना।
होगी शादी कहाँ आप की बेटियों के बिना।
इनको फेंको नहीं,झाड़ियों में जा के कहीं।
ये है बिलकुल गलत,कहीं से भी है न सही।
बेटियों को बचाओ और खूब पढ़ाओ इन्हें।
शक्तिशाली और आत्म रक्षक बनाओ इन्हें।
बेटियां आप की माँ भारती की वो शान हैं।
हर एक घर की व हर माँ-बाप की जान हैं।
छूरहीं आसमां अपने हुनर से आज हर बेटियाँ।
कौन सा क्षेत्र है जहाँ बुलंदी पर नहीं हैं बेटियाँ।
आइये लें यह शपथ मिल के हम आप सब।
इनको पालेंगें,पोशेंगें और नहीं मारें गें अब।
कविता लिखने का तभी कोई मेरा मान है।
जब दिखे बेटियों को मिलता ये सम्मान है।
नारी सशक्तिकरण करना जरूरी बहुत।
अपने पैरों पर ये खड़ी हों जरूरी बहुत।
स्वयं सहायता समूह आज संचालित खूब।
नारियों को मिले हैं काम आमदनी है खूब।
आज देखो तो पाओगे लड़कियाँ स्त्रियाँ।
संस्थाओं में हैं कामकाजी बेटियाँ स्त्रियाँ।
नारी सशक्तिकरण का यही तो परिणाम है।
बेटियों के स्वतंत्रत निर्णय लेने का इनाम है।
आज की नारियाँ पहले जैसे अबला नहीं।
नेतृत्व कररहीं घूँघट वाली ये अबला नहीं।
इनको मौका मिले तो ये समय से आगे बढ़ें।
हर जगह खुद सफलता की यह सीढ़ी चढ़ें।
दृढ़ इच्छाशक्ति एवं बल से ना कमजोर हैं।
काम पुरुषों से ज्यादा करें ना कामचोर हैं।
नारी सशक्तिकरण से होगा समग्र विकास।
सेल्फमेड नारियों का बढ़ेगा आत्मविश्वास।
दूसरों पर कभी नहीं होंगी फिर ये आश्रित।
आत्मनिर्भर बनेंगीं रहेंगीं न फिर निराश्रित।
रचयिता
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
