पुस्तक-ज्ञान जरुरी हैं जीवन में।
पुस्तक से बढ़े ज्ञान एवं संस्कार।।
गुरु व पुस्तकें शिक्षा हमको देते।
करें मार्गदर्शन हो चरित्र निर्माण।।
दूर भागता है जो शिक्षा लेने से।
वह जीवन भर रह जाता गंवार।।
शिक्षा से उन्नति प्रगति है होती।
भरता है पुस्तक से ज्ञान भंडार।।
अहंकार का नाश भी है करती।
शिक्षा व्यक्तित्व करे चमकदार।।
पुस्तक मार्ग आलोकित करती।
शिक्षा हटाती है सभी अंधकार।।
पुस्तकें जीवन को सुगम बनायें।
विनम्र बनाये व बढ़ाये संस्कार।।
शिक्षा बिना ये अधूरा है जीवन।
सुखी ना रह सकता है परिवार।।
सम्मान समाज में बढ़ाये शिक्षा।
पुस्तक शिक्षा प्रगति के आधार।।
पुस्तक बिन न हर शिक्षा संभव।
अच्छी पुस्तक को करें सब प्यार।।
अच्छी बुरी पुस्तकें दोनों ही होती।
चुनना एवं पढ़ना दोनों हमें है यार।।
शिक्षा के मंदिर हैं खुले हर जगह।
जायें पढ़ें करें नौकरी या व्यापार।।
पुस्तकों एवं शिक्षा में ऐसा नाता।
बना लाइब्रेरी रखें पुस्तक भंडार।। 
ईमान धर्म  सच नेकी पर चलना।
शिक्षा से ही आता है यह विचार।।
घर-2 में दीप जलायें शिक्षा का।
ज्ञान पुँज से लौकिक हो संसार।।
अनपढ़ कोई धरा पे रह न जाये।
शिक्षा से सिंचित हो हर परिवार।।
पुस्तकों का काम सदा जीवन में।
ये कभी नहीं हो सकती हैं बेकार।।
जब भी कभी इनको खोलो पढ़ो।
कुछ न कुछ ज्ञान दे जाती हैं यार।।
पुस्तक व शिक्षा प्रेमी जो होते हैं।
उनके पास ही होता ज्ञान भंडार।।
पुस्तकें और शिक्षा ही हमें बनाते।
डॉक्टर इंजीनियर वकील सरकार।।
विश्व पुस्तक दिवस पर आये हम।
संकल्प लें करेंगें जीवन भर प्यार।।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
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