उससे मिले हुए,देखें हुए मुझे पूरे तीन महीने हो गये थे, और मैं उसके बिना रह नहीं पा रही थी,कभी कभी लगता कि मैं उसे हमेशा याद करती हूँ, उसको मेरी याद नहीं आती क्या l एक मैं ही हूँ जो हमेशा उसे फ़ोन करती रहती हूँ, लंबे लंबे मैसेज़ करती रहती हूँ पर कभी मजाल है कि उसका रिप्लाई आ जाए और तो और शिकायत करो तो झुंझला के कहता है कि मुझसे नहीं होता कि लंबे लंबे मैसेज़ टाईप करुँ ..इससे अच्छा तो वीडियो कॉल करलो l कॉल भी मैं ही करती हूँ हमेशा..पर कभी पलटकर उसका कॉल नहीं आता कि हाल चाल ही पूछ ले l 
मैं और वो बिल्कुल दो अलग इंसान थे l वो बिल्कुल नपा-  तुला बोलने वाला इंसान.. अपने शब्दों को तभी खर्च करता जब तक कि उसके बिना उसका काम ना चले और मैं उतनी ही बातुनी l मैं खुशमिजाज और वह धीर गम्भीर हमारे बीच कुछ भी कॉमन नहीं था l फ़िर भी हम साथ थे और एक दूसरे को बहुत ही अच्छी तरह समझते भी थे l 
हम जीवन की ऐसी शाम में मिले थे जहाँ आपको एक साथी की जरूरत हमेशा महसूस होती है l हम भी ऐसी ही कश्ती में सवार थे.. उम्र के 40 दशक देखने के बाद हम दोनों के ही जीवन में ऐसा कुछ हुआ कि दोनों को ही लगा कि अभी जीवन में सब कुछ ख़त्म नहीं हुआ है, बस थोड़ा बोझिल है बस.. अभी भी अन्दर पूर्णत: अंधेरा नहीं पसरा.. कुछ भावनाएँ अभी भी शेष हैं..और हम दोनों ने ही आगे बढ़ने का फ़ैसला किया l 
एक मेट्रिमोनियल साईट पर ही विपुल से मुलाकात हुई.. और एक दूसरे का प्रोफ़ाइल पसंद आने पर हमने मिलने का फ़ैसला किया l वो रिश्ते में धोखा मिलने के बाद एक तलाकशुदा था और मैं एक विधवा.. जिसकी शादी 21 वर्ष की उम्र में विशेष से हुई थी.. सब कुछ ख्वाबों सा सुन्दर, दीवानों सा प्यार करने वाला पति,अच्छा परिवार, किसी चीज की कोई कमी नहीं, दो बच्चे…हवा के झौकें से कि पता ही नहीं चला कि कब 10 वर्ष हो गए और फ़िर एक दिन एक हादसे ने सब कुछ बिखेर दिया l फ़िर अपने आप को सँभाला और विशेष की यादों और बच्चों को बड़े करने में पता ही नहीं चला और ना ही किसी की जरुरत महसूस हुई…कब 12 वर्ष निकल गए l बच्चे भी अपनी अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए और वह अकेली पड़ने लगी l जब अकेलापन घेरता है तभी सबसे ज्यादा किसी के प्रेम की, परवाह की, जरूरत महसूस होती है l
पहली बार उससे मिलकर कुछ अजीब सा लगा.. शायद उसकी वजह ये भी थी कि मेरे पास जितनी सुन्दर यादें थी, उसका पुराना जीवन और यादें उतनी ही कड़वाहट से भरी हुई थी l जहाँ मुझे प्यार और विश्वास का साथ मिला था और उसे घृणा और धोखा मिला था ..पर ना जाने क्यों कुछ तो था हमारे बीच जो हमें बाँध रहा था l 
शायद इसलिए हम दोनों ने ही आगे भी एक दूसरे से  मिलने का और एक दूसरे को समझने का फ़ैसला किया l हम रोज मिलने जुलने लगे और बहुत ही जल्द एक दूसरे के बहुत करीब आ गये थे और बहुत ही अच्छे दोस्त बन गए थे l 
मुझे जब भी कोई परेशानी आती तो वह हर वक्त एक संबल की तरह मेरे साथ होता था l वह कभी भी जताता नहीं था पर जानती थी कि मैं भी उसके एकाकी जीवन की जरुरत बन गयी थी l हम हर दिन एक दूसरे से मिलने का कोई न कोई मौका तलाश ही लेते थे और घंटो एक दूसरे का हाथ पकड़ घूमते रहते l 
मैं किसी ना किसी बहाने अपने ज़ज्बात जाहिर कर ही देती..पर वह हमेशा खामोश ही रहता l मुझे उसका ये रूखापन कभी कभी बहुत कचोटता ..और कभी बहुत चिढ़ भी जाती तो उसका एक ही जवाब होता.. समझती हो तो कहने की जरूरत क्या है.. हम दोनों को ही एक दूसरे की जरूरत है l तुम जानती हो मै किसी पर भी भरोसा नहीं कर पाता l 
ये सुनते ही मुझे बहुत गुस्सा आता कि क्यों उसके साथ हूँ ? पर ना जाने क्यों ? जब वो मेरी परवाह करता,मेरी जरा सी तकलीफ़ में परेशान हो जाता ..और जब भी उसकी गहरी काली आँखो में देखती तो सब भूल जाती l 
मैंने उसे कई बार अपना प्यार जताया था पर इतना लंबा वक्त हो गया था पर उसने मुझे आज तक कोई भी जवाब नहीं दिया था l मैं उसे समझती थी पर मेरा दिल हमेशा से चाहता था कि वो एक बार तो कभी, मुझे अपना प्यार दिखाये… ये मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिश बन गई थी l
वो कभी अपनी ओर से शुरुआत करता ही नहीं था और उस पर ये लॉकडाऊन ..उससे मिले हुए तीन महीने गुजर गये l मैं उससे रोज ही घंटो बातें किया करती थी.. 
पर एक दिन अचानक से मेरी सासु माँ की तबीयत खराब हो गई…. एक तो ये वायरस का डर दूसरा हॉस्पिटल की भागमभाग.. उस सबमें इतना उलझी कि उससे बात करने का टाईम ही नहीं मिला l इन सब में एक सप्ताह बीत गया और मेरी उससे बात ही नहीं हुई l 
उस दिन मैं हॉस्पिटल से लौटी तो थककर कुर्सी पर बैठी ही थी कि तभी मोबाइल की रिंग हुई तो देखा उसका कॉल है.. देखकर खुश हो गई.. फ़िर मुझे याद आया कि मैंने उससे कब से बात नहीं की हैं, और अभी पता चलेगा कि माँ बीमार है उसे बताया नहीं तो और भी ज्यादा गुस्सा करेंगे l
उसने कॉल पिक किया तो वहाँ से उसकी घबराई हुई भर्राई सी आवाज आयी ..क्या हुआ तुम्हें तु..तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रही हो.. 3 दिन से कॉल कर रहा हूँ.. क्या हुआ है ! तुम ठीक हो ना.. वहाँ सब ठीक है ना ..कोई प्रॉब्लम तो नहीं है.. क्या छिपा रही हो l 
आज मैं बता नहीं सकती कि मैं कितना खुश थी मैं उसकी आवाज में वह प्यार, वह तड़प महसूस कर पा रही थी.. जो मैं हमेशा से महसूस करना चाहती थी l
उधर मेरे कोई जवाब ना देने पर वह ओर भी घबरा गया.. तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो.. उसकी आवाज से जैसे मैं नींद से जागी.. अ.हा.हाँ  अरे कुछ नहीं सब ठीक है.. वो बस अचानक से माँ की शुगर और बी पी साऊट कर गया था तो उन्हें हॉस्पिटल मे एडमिट कराना पड़ा.. सोचा आपको बतादूँ पर फ़िर सोचा आपको बताऊगी तो आप यहाँ चले आयेगे और मानेगे भी नहीं इसलिए नहीं बताया,
.. कोरोना इतना फ़ैल रहा है और फ़िर हॉस्पिटल मे आना जाना ..सभी रेलेटिव के इतने फ़ोन आ रहे थे कि मैंने फ़ोन सायलेन्ट पे डाल दिया था.. इसलिए शायद आपके मिस कॉल नहीं देख पायी.. थैंक गॉड कि सब ठीक है.. माँ अब ठीक है.. कल डिश्चार्ज भी हो जायेगी l वैसे एक बात बताऊँ …..क्या??  
…मैं आज बहुत खुश हूँ.. अच्छा हुआ जो मैंने बात नहीं की.. कम से कम मुझे पता तो चला कि आप मुझे मिस कर रहे है l
तुम्हें मज़ाक लग रहा है ये.. तुम्हें पता भी है मुझपे क्या बीत रही थी.. तुम्हारी बातों से ही तो मेरी साँसे चलती है.. दो तीन दिन जब तुम्हारा फ़ोन नहीं आया.. कोई मैसेज नहीं तो पहले लगा शायद बिजी होगी.. पर मेरा एक एक पल ,एक एक लम्हा कितना मुश्किल बीता पता भी है.. फ़िर लगा कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि तुम मुझे 4 दिन तक कॉल ना करो.. पता मैं कितना डर गया था..? मैं  जब तुमसे दूर हुआ तो जाना कि मैं तुम्हारे बिना एक पल नहीं रह सकता..आ..आई लव यू वेरी मच ..प्लीज़..प्लीज विल यू मैरी मी.. l
ये सुनकर मैं स्तब्ध थी… मेरे धड़कनों की आवाज़ मेरे कानों तक आ रही थी.. कभी सोचा नहीं था कि ये दूरी और लॉकडाऊन मुझे दुनिया की सबसे बड़ी खुशी दे जाएगा l कुछ दिन की दूरी मुझे इतना खूबसूरत तोहफ़ा दे जायेगी 
✍️शालिनी गुप्ता प्रेमकमल 🌸💕
(स्वरचित)सर्वाधिकार सुरक्षित
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