विकास करते करते अभिशाप ला दिया,
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चारो तरफ है वाहनों का हल्ला शोर,
चलता नही व्यवस्थाओं पे कोई जोर,
हरी भरी वसुंधरा को मरुस्थल बना दिया।
विकास करते करते अभिशाप ला दिया।
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धुंआ उगल रहे शहर और फेंकते रहे जहर,
उपचार है कोई नही बीमार है रहे टहल,
पवित्र पाविनी को भी संकट में ला दिया।
विकास करते करते अभिशाप ला दिया।
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ईमान धर्म बेंच के सब कुछ है खा गए,
इंसानियत को मार के हैवान बन गए,
नफरत के बीज बो के झगड़ा करा दिया।
विकास करते करते अभिशाप ला दिया।
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इंदु विवेक उदैनियाँ (स्वरचित)
जालौन (उत्तर प्रदेश)
