अस्पताल में अपनी ड्यूटी कर रही थी रीता अचानक थरथर कांपने लगी। तभी दूसरी नर्स पास में आते हुए क्या हुआ ठंड लग रही है क्या नहीं पता नहीं आज क्या हो रहा है। मन अजीब सा बेचैन हो रहा है कोई पुकार रहा है ऐसा लग रहा है कोई परिचित मुझे बहुत याद कर रहा है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है आखिर हो क्या रहा है। सुनो तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं लग रही है तुम क्या बोल रही हो मुझे समझ में नहीं आया।
रीता ऐसा करो आज छुट्टी ले लो दो-तीन दिनों के लिए । रीता ने उसकी सलाह को मानते हुए अस्पताल से छुट्टी लेना उचित समझा। रीता को घर में आने के बाद भी किसी की रोने और चिल्लाने की आवाज आ रही थी वह थरथर कांपने लगी फिर भी उसने हिम्मत बाधते हुए पूछा तुम कौन हो ऐसे हंसी ठिठोली क्यों कर रही हो मत डराओ मुझे मेरे सामने आओ। भूल गई क्या मैं आरती तेरी बचपन की दोस्त। रीता के शरीर से जान निकल गई यह तो आरती की आवाज लग रही है। ऐसा मुझे क्यों महसूस हो रहा है मेरे आस-पास वह तो अपने ससुराल में होगी। मायके गए हुए भी तो तीन-चार साल हो गए वह अभी सोच ही रही थी उसे लगा कुछ कहना चाहती हो सुनो ना रीता मैं मर चुकी हूं। मेरे पति ने मेरी बेटी को ठुकरा दिया है उसे अपना खून मानने से इंकार कर रहे हैं। क्या मेरी बेटी लावारिस है इसका इंसाफ चाहिए मुझे। पर भगवान की नीयति देखो मुझे भगवान ने उपर बुला लिया। मुझसे मिलने नहीं आई कम से कम मेरे जनाजे में तो आओ। रीता आंखें फाड़ फाड़ कर सामने देखने लगे उसे अपनी सहेली की परछाई सी महसूस हुई। वह बात करना चाहती थी पर वह नर्वस होने लगी। रीता अपना विशेष ख्याल रखना सुनो ना एक बहुत बड़ी महामारी आ रही है वायरस रीता के कान खड़े हो गए। रीता ने डरते हुए कहा मुझे बहुत डर लग रहा है मैं तुमसे बात नहीं कर सकती तुम दूसरी दुनिया चली गई हो। रीता तुम डरो नहीं मैं तुम्हारी भलाई चाहती हूं तुम लोगों को सतर्क करो उसे बताओ सफाई मुंह में मास्क सैनिटाइजर, और वायरस के बारे में। क्या कहना चाहती हो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है। तभी काम वाली की आवाज सुनाई पड़ी खिड़की से झांकते हुए मेम साहब कब से बेल बजा रही हूं आप खोल क्यों नहीं रही हैं। रीता ने काम वाली की तरफ देखते हुए कहा अच्छा किया तू वक्त पर आ गई अभी आती हूं मैं इतना कहकर तुरंत ही भाग कर दरवाजा खोलने चली जाती है।
क्या हुआ आप बहुत परेशान और पसीने पसीने हो रहे हैं आपकी तबीयत तो ठीक है ना। रीता ने छुपाते हुए कहा थोड़ी गर्मी लग रही थी। कुछ बात नहीं है रीता को ऐसा लग रहा था जैसे बस उसकी प्रिय सहेली उसको किसी खतरनाक तूफान के बारे में बता रही थी जो भविष्य में आने वाली है। वह काम वाली को बताना चाहती थी पर उसने समझा कहीं उसे बाबला ना समझ बैठे। मैं रीता को लेकिन महसूस हो चुका था वह छोड़ कर जा चुकी है। उसकी आंखों में झर झर आंसू बहने लगे।
सपना कुमारी जहानाबाद बिहार
