वसंतोत्सव की बेला, देखो कैसी आज छा रही,
चहुँओर से अम्बर की, धानी चुनर लहरा रही,
रंग रूप खिला मौसम का कैसी मनोहर धूप है,
खिले खिले फ़ूलों की सुगन्ध सबकुछ महका रही।
फसलों से सजे हैं खेत, पीली सरसों भी लुभा रही,
सुनहरे से रंग में रंगी प्रकृति सारी सबको भा रही,
अद्भुत से इन रूपों को मनाने के कई कारण हैं,
इन सबको साथ में भर वसंतोत्सव दुनिया मना रही।
पूजा पीहू
