आज़ादी के लिए हमारी लंबी बड़ी लडाई थी
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी
गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है
हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है
लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से
हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से
आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से
विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
रंजना झा
