लेखक… कल्पनाओ का रचयिता
कलम से अल्फाज़ो को एक तार में पिरोना…
क्या होता है लेखक का सपना..
अपने अल्फाज़ो को एक रूप दे पाए
साकार कर पाए अपने ख़्वाबों की नैया को,
प्रेम, सकारात्मकता का भाव
संसार में भर पाए,
अपनी लेखनी को बनाकर जादू की छड़ी
समाज को सही दिशा दे पाए,
होते है कुछ भाव अनोखे,
जो जबाँ से बयां नहीं होते,
कुछ बातें होती है जो अक्सर
लिखकर ज़ेहन में उतारी जाती है,
एक लेखक,
लिखता है, गढ़ता है, शब्दो को अपने अनुरूप,
सपना बुनता है वो एक नई उम्मीद का,
अपने गीतों, किस्सों, कहानियों से,
आईना दिखा पाए वर्तमान का, भान कराये भूत में हुई त्रुटियों का,
भविष्य उजागर करने के अवसर का प्राप्त कराये,
एक लेखक, यूँ ही लेखक नहीं बनता
ताना बाना बुनकर अल्फाज़ो का
कारवां बनाना होता है,
बुनता है वो सपना,
पाठको का मनोरंजन हो पाए,
शिक्षा और ज्ञान भी वितरित हो जाये,
मौलिक, नैतिक बातों का
ज्ञान जहां में फैल जाये,
सच्चाई और झूठ का
फर्क समझ में आजाये,
लेखक का सपना होता है कुछ यूँ,
लिख दे अपने भाव ऐसे,
भ्रष्टाचार का नाश हो,
झूठ,पाप और कुकर्म का स्थान ना हो।
हर ओर फैले मित्रता और सदभाव,
सच्चाई का नाम हो,
जातपात,भेदभाव का नाश हो।
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर, उत्तराखंड
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