दुनिया का सबसे पहला है सफल रोबोट।
1931 में अमेरिका का वह जार्ज रोबोट।
सपेरो जायरोस्कोप कंपनी का ये रोबोट।
एक स्वचालित विमान में चालक रोबोट।
आमतौर से होताहै रोबोटों का इस्तेमाल।
समान उठाने वेल्डिंग करने में इस्तेमाल।
साफ सफाई करने पैकेजिंग में इस्तेमाल।
असेम्बलिंग करने में  भी करते इस्तेमाल।
ऐसे कार्यों को करने को विशेष हाथ होते।
स्वचालित मशीन का ये ऐसे हाथ हैं होते।
औद्योगिक  रोबोटों ने उत्पादन बढ़ाया है।
बदली है परिभाषाएं क्षमता भी बढ़ाया है।
रोबोट एक आभासी यांत्रिक कृतिम एजेंट।
व्यवहारिक रूपसे ये विद्युत यांत्रिकी एजेंट।
देखने एवं गति में ऐसे होते जैसे एक इरादा।
अपना निजी अभिकरण हो पक्का 1इरादा।
चीनी ड्रैगन ने सबसे बड़ा यह रोबोट बनाया।
चार पैर से चलने वाला ‘रोबोट याक’ बनाया।
ये इंसान बना रोबोट आज वो आपाधापी में।
भागदौड़ से भरी जिंदगी हुईहै आपाधापी में।
चैन नहीं जीवन में दिन रात कमाए बैल बना।
मशीन बन गया है खुद वह कमाऊ बैल बना।
रिश्ते नाते जज्बातों की कोई भी नहीं फिकर।
अपनेपन की एहसासों की कोई नहीं फिकर।
जिंदगी एक मशीन की तरह हो गई है केवल।
सुख दुःख का ही कुछ समय रह गईहै केवल।
एक दूजे के होड़ में ऐसा अन्धा हुआ आदमी।
जिम्मेदारी बोझ से दबा पिसा हुआ है आदमी।
जीवन में जो मजा कभी था रहा ना अब कोई।
ये भी बिल्कुल ठीक नहीं है नहीं फायदा कोई।
हे!इंसानों इंसान है रहना रोबोट नहीं है बनना।
इंसान ही यह दुनिया की हर खोजों का गहना।
कोई रोबोट अभी तलक इंसान नहीं बनाया है।
इंसानों ने ही सब कुछ रिबोट भी तो बनाया है।
सबसे बड़े वैज्ञानिक डॉक्टर इंजीनियर भगवान।
उसने 84लाख योनियां बनाई प्रभु है बड़े महान।
इनमें उसने सबसे बुद्धिमान मानव को है बनाया।
मानव ने ही दुनिया में ना जाने क्या-2 है बनाया।
इसलिए शरीर को स्वस्थ रखें खुद रोबोट बनें ना।
रिश्ते नातों को जियें खुशी से दायित्वों से हटें ना।
कंप्यूटर मोबाइल रोबोट का भले आया जमाना।
जिसमें खुशी शांति संतोष मिले मार्ग  अपनाना।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पीबी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
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