छुकछुक कर आती है रेल
धुआं उड़ाती आती है रेल,
सबके मन को भाती रेल
मंजिल तक पहुचाती रेल,
तरह तरह के लोग है मिलते
तरह तरह की बाते करते,
तरह तरह के विचार यहां
जारो लोग रोज है जाते,
हजारो लोग रोज है आते
सही सलामत सबको तो
पहुंचाती हमारी रेलगाड़ी,
अजब गजब के तमाशे यहां
तरह तरह के तो नाश्ते यहां
बादाम, चने, खीरे, भुटठे
लिटटी, पकौड़ी वालो की चाँदी है,
लस्सी, कोल्डपेय, चाय की बहार है,
सबकी चलती तो सरकार यहां है
सबके जीवनयापन का साधन है यह,
सुरक्षित पहुंचाती सभी को रेल
बड़ी बड़ी बाते यहां है
कोई सरकार बना रहा है,
कोई किस्से सुना रहा है
कोई आराम फरमा रहा है,
डिब्बो मे है भरी रौनक है
लोगो से है चकाचक डिब्बे है
यात्रा को सुखद बनाती है,
तरह तरह के नजारे दिखाती रेल
बच्चों को भाती है रेल
उछल कूद करते है वे
कभी इधर तो कभी उधर
हम सबकी प्यारी रेलगाड़ी
सभी को भाती रेलगाड़ी।
