खरबूजे को देख खरबूजा रंग बदलता

परिवार से ही मिलते

बच्चों को संस्कार

परिवार से ही नींव बनती

इसी से बनता आधार

जैसा देखते बड़ो को

वैसा ही करते व्यवहार

सीखते बड़ों से ही

प्यार तहजीब और आदर सत्कार

घर ही उनकी प्रथम पाठशाला

माहौल उसका प्रभावित करता

जैसे देख खरबूजे को

दूजा खरबूजा रंग बदलता

यही उनकी फितरत है

यही है उनकी नियति

वैसे ही बच्चे भी तो

बड़ों का ही अनुसरण करते

खरबूजे की भांति ही

वो भी अपना रंग बदलते।

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