बहती गंगा में हाथ धोना
एक बेचारा हालात का मारा
चोरी करते पकड़ा गया
बीच बाजार पिट रहा
उसकी चोरी की मजबूरी
कोई नही समझ रहा
समझते नही या फिर कोई
जानकर अनजान बनते
किन हालातों से मजबूर होकर
रोटियां चुराई उसने
जब बर्दाश्त नहीं हुआ उससे
अपने बच्चो का भूख से तड़फना
पानी पीकर पेट की आग बुझाना
तब उसने अपना जमीर मारकर
हालातों से मजबूर होकर
वो चोरी करने निकला था
पर हाय री किस्मत ,दगा दिया
और वह पकड़ा गया
जुड़ गई वहां भीड़ भारी
समझा नही कोई उसकी लाचारी
जो भी आता वही मारता
बहती गंगा में हाथ धोता
बिना समझे बूझे, जाने यह
कि आखिर मामला क्या है ?
