यदि तुम देशप्रेमी हो, और प्यार वतन से करते हो।
जान देने का आने पर समय, क्यों मरने से तुम डरते हो।।
यदि तुम देशप्रेमी हो————–।।
तुम करते हो गुणगान बहुत, शहीदों का बड़े जोश से।
तुम गाते हो गीत वतन के, महफिल में बड़े जोश से।।
कहते हो सबको बदलने को,क्यों खुद को नहीं बदलते हो।
यदि तुम देशप्रेमी हो—————।।
तुम रोज मंदिर में जाते हो, करते हो पूजा ईश्वर की।
करते हो मिन्नत तुम रब से, पाने को खुशी अपने घर की ।।
उपकार की करते हो बातें,उपकार क्यों नहीं तुम करते हो।
यदि तुम देशप्रेमी हो—————।।
कथनी-करनी में भेद नहीं करो, ईमान की राह तुम भी चलो।
इंसाफ सभी से सच्चा करो, और नीयत अपनी तुम भी बदलो।।
क्या मतलब तुमको महलों से, क्यों दीपक तुम नहीं बनते हो।
यदि तुम देशप्रेमी हो————–।।
रचनाकार एवं लेखक-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
