चलूंगी तेरा दामन थाम कर,
जीवन के हर मोड़ पर,
साथ देना हर घड़ी हर पल,
मेरे साथी मेरे हमसफर।
गले लगा लेना हमको,
हो जाए कोई खता अगर,
न रूलाना कभी सताकर,
मेरे साथी मेरे हमसफर।
मुझे रखना दिल में छुपाकर,
न जाना कभी मुझसे दूर,
सात कटे जीवन का सफर,
मेरे साथी मेरे हमसफर।
मैं प्यासी मौज तू साहिल मेरा,
मैं टूटी कश्ती तू पतवार,
ले चल मुझे तू अपने नगर,
मेरे साथी मेरे हमसफर।
निसार करे ‘लता’ जिंदगी,
‘यश’ की हर एक सांस पर,
मिट जाउं मैं तेरे नाम पर,
मेरे साथी मेरे हमसफर।
स्वरचित रचना
रंजना लता
समस्तीपुर, बिहार
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