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मेरे चमन के प्यारे फूलों, ऐसी बहार बनो तुम।
महके शहीदों की मजारें , विजय का हार बनो तुम।।
मेरे चमन के प्यारे फूलों———-।।
कह दो अपनी जुबां से तुम, कायर नहीं हो दिल से।
सपूत हो इस वतन के तुम, जुड़े हो इसकी मंजिल से।।
चुकाओ कर्ज इसका तुम, वफादार इसका बनो तुम।
मेरे चमन के प्यारे फूलों————।।
झुकाओ सिर नहीं अपना, दुश्मन के सामने कभी।
जिससे हो वतन की शान कम,करो नहीं वह काम कभी।।
हर कोई  गर्व तुम पर करें, ऐसा गुलशन बनो तुम।
मेरे चमन के प्यारे फूलों————।।
तुम बांटना अपनी खुशियां, वतन में सबको बराबर।
मजहब हो चाहे कोई भी, देना सबको सम्मान बराबर।।
करना इंसाफ बराबर तुम, ऐसा यहाँ इंसान बनो तुम।
मेरे चमन के प्यारे फूलों————।।
रचनाकार एवं लेखक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
ग्राम- ठूँसरा, जिला- बारां(राजस्थान)
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