मत काटो मेरे पंख,
मुझे उडने की अभिलाषा है।
अभी अंबर छुना बाकी है,
मुझे जीने की अभिलाषा है ।।
कहाँ मांगती कुछ तुमसे ,
अपने बल पर उडना चाहूं।
इस धरती से उस अंबर तक, अपने पद्म चिंह रखना चाहूं ।।
मैं चमकु गगन में तारों सा,
मेरे दिल की अभिलाषा है ।
मत काटो मेरे पंख मुझे,
उडने की अभिलाषा है ।।
मत रोको मेरी राह मुझे,
नदीयों सा बह जाने दो ।
मन में उठते तुफानों को,
सागर में मिल जाने दो ।।
अस्तित्व रहे मेरा सदियों तक, मेरे दिल में अभिलाषा है ।
मत काटो मेरे पंख….. ।।
उपवन में फूलों सा महकु ,
मैं गगन में तारों सा चमकु। सरीता की शीतल धारा बनु ,
मैं सबकी आँख का तारा बनु,।। मीरा तुलसी सा अमर रहुं ,
ये मेरी अभिलाषा है ।।
मत काटो मेरे पंख,
मुझे उडने की अभिलाषा है।।
स्वरचित व मौलिक रचना रचनाकार : नूतन राय नालासोपारा, महाराष्ट्र
