सब देशों में न्यारा है, मेरा भारत सबसे प्यारा है।
उत्तर में है खड़ा हिमालय
पल-पल सौंदर्य बढ़ाता है,
दक्षिण में लहराता सागर
विशालता के गीत गाता है।
कहते है जिसको घर का स्वर्ग
ऐसा कश्मीर हमारा है।
सब देशों में न्यारा है, मेरा भारत सबसे प्यारा है।
कण-कण को पावन करती
माँ गंगा की धार यहाँ,
हर-हर महादेव जहां गूंजे
वह काशी और हरिद्वार यहाँ।
धर्म के खातिर रामचंद्र ने
यहाँ रावण को संहारा है।
सब देशों में न्यारा है,मेरा भारत सबसे प्यारा है।
जीर्ण शीर्ण करते तन को
परमार्थ के खातिर सन्त यहाँ,
किंकर्तव्यविमूढ़ हुए अर्जुन को
केशव ने दिया गीता का ज्ञान यहाँ।
हर बाला यहाँ राधा है
हर बालक कृष्ण सा प्यारा है।
सब देशों में न्यारा है,मेरा भारत प्यारा है।
मन्दिर और मस्जिद का रास्ता
जहां एक ही जाता है,
भगवा और हर मिलकर
जहाँ श्वेत शांति का सन्देशा लाता है।
स्वर्ग लोक की ध्वजा सा चमके ऐसा वो तिरंगा हमारा है।
सब देशों में न्यारा है, मेरा भारत प्यारा है।
शीला द्विवेदी “अक्षरा”
उत्तर प्रदेश
