यह कौन सी कुरीति है समाज का,
जो सदियों से चला आया है,
अंधेरा छा गया जिस जीवन में,
उस आंगन रौशनी झिलमिलाया है।
पुत्र का भविष्य है संकट में,
रोटी की समस्या आन पड़ी है,
अब कैसे ब्याही जाएगी बेटी,
मुश्किलों की यह अजब घड़ी है,
इस चिंता में एक और भी चिंता,
मृत्यु भोज के रूप में आया है,
अंधेरा छा गया जिस जीवन में,
उस आंगन रौशनी झिलमिलाया है।
स्वरचित रचना
रंजना लता
समस्तीपुर, बिहार
