छोड़ गये सब तुमको अकेला, जायेगा अब तू कहाँ।
ना कोई अब तेरा सहारा, मिलेगी पनाह अब कहाँ।।
छोड़ गये सब तुमको——————-।।
जब तक थी तेरे पास में दौलत, मिली तुमको मोहब्बत।
नादान, नासमझ है तू , नहीं समझा इनकी हिमायत।।
मुकुर गये सब अपनी वफ़ा से, वह प्यार गया अब कहाँ।
छोड़ गये सब तुमको——————-।।
यह खुशबू ,ये जलती मशालें, तू आँखों से पर्दा हटाले।
कर दिया बर्बाद इन्होंने, तू समझ इनके खेल निराले।।
बेरंग है अब महफिल तुम्हारी,शान तेरी वह अब कहाँ।
छोड़ गये सब तुमको———————।।
इन दोस्तों का यह अपनापन,धोखा है , एतबार नहीं।
मिलेगी नहीं इनसे हिफाजत, सच्चा इनसे सम्मान नहीं।।
बिछा दिये नश्तर तेरी राहों में,इनकी नजरों में शर्म कहाँ।
छोड़ गये सब तुमको——————–।।
साहित्यकार एवं शिक्षक- 
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
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