कतेक करू मिथिला के बखान,
खान पान और परिधान……।
            पहिल गुणगान खान पान,
            प्रसिद्ध ऐछ माछ मखान
              दही चूड़ा मालदह आम
              जौं नै भेटल रेहू के तीमन
              नीक नै भेल तखन भोजन
             बड़ी भात तिलकोरक पात
            कि कहूं सुवादक बात
             भोजन के अंत में जौं भेटल पान
           सम्पूर्ण भेल भोजन के गुणगान……..।
अब आयल परिधानक बारी,
धोती कुर्ता बनारसी साड़ी
राम चन्द्र सन पुरूष दिखै
सीता सन दिखै हर नारी
वैदिही के इ धरती क करै
छी हम  प्रणाम ……।
सबहक ह्रदय,
म बसै कवि विद्यापति महान
मिथिला पेंटिंग बढाबे शान
   सबसँ अलग अपन पहचान
कतेक करूं मिथिला के बखान
जय मिथिला जय मैथिल महान 🙏🙏
(स्वरचित मौलिक)@ऋचा कर्ण ✍️✍️
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