बहुत नजदीक से देखा,
तो समझ मे आया सब हाल ,
नाम के है सारे रिश्ते ,
हकीकत में सब माया जाल है ,
सुकून नहीं है चारों तरफ,
दिखावे का सब हाल है,
ज्यादा चाह की सोच मे,
सबका हाल बेहाल है,
समय का आभाव है ,
फिर भी अपनों के मोह का जाल है,
खुशियाँ भी फंस रही एक दल दल मे,
हर तरफ झूठी हंसी का जंजाल है,
रिश्तों का तो नाम है,
सब फसें है माया के जाल मे।
