वैसे तो भारत 15 अगस्त 1947 को पूर्णतया स्वतंत्र हो चुका है परंतु आज भी कई बातें जो विचारणीय है।
क्या हम मानसिक रूप से स्वतंत्र है?, क्या हमें संपूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है??
आज भी लोग पूर्णतया रूप से मानसिक स्वतंत्र नहीं है क्योंकि समय तो बदला परंतु लोगो विचार और सोच आज भी वही की वही है।
बेरोजगारी भ्रष्टाचार शिक्षा की कमी ऐसे अनेक कारण हैं जिनके कारण हम आज भी मानसिक रूप से स्वतंत्र नहीं हैं। कुछ उदाहरण आपके सामने रखता हूं जरा गौर कीजिएगा।  
जब हम किसी से यह बात सुनते हैं की किसी व्यक्ति का काम कराने के लिए किसी अधिकारी या किसी सरकारी कर्मचारी में कुछ रिश्वत की मांग करी है तो हम उसको बोलते हैं कि कैसा भ्रष्ट आदमी है और भ्रष्टाचार की बातें बताएं लगते हैं परंतु जब हम अपने बच्चों के लिए नौकरी की बात करते हैं तो हमेशा सबके मन में नौकरी के साथ-साथ ऊपरी कमाई का भी जरिया खोजा करते हैं।
अब आप जरा सोचिए क्या अंतर है उस अधिकारी में और हमारी अपनी सोच में । बस वही तो है मानसिक रूप से परतंत्र होना।
और इसी तरह कि कई अवधारणाएं आज भी हमें मानसिक रूप से गुलाम बनाए हुए हैं।
समय तो बदल गया पर हमारी सोच हमारे विचार आज भी गुलाम है।
मैं नहीं कहता कि आप संस्कृति को बदल दीजिए आप संस्कारों को हटा दीजिए परंतु संस्कृति और संस्कार के साथ साथ हमें समय के अनुरूप ढलना होगा तभी हम संपूर्ण रुप से मानसिक स्वतंत्रता हासिल कर सकेंगे और यह आज के टेक्नोलॉजी के समय में बहुत जरूरी है और जिस दिन हम अपने संस्कारों संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ अपने वैचारिक मतभेद हटाकर अपने विचारों को समय, परिवेश तथा परिस्थिति के अनुकूल परिवर्तित करना सीख जाएंगे वही दिन हमारी वास्तविक स्वतंत्रता का दिन होगा जिसमें हम सामाजिक तथा व्यक्तिगत और मानसिक तीनों प्रारूपों में स्वतंत्र होंगे।
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