बचत पर कैंची चल गई
हाय ! महंगाई देखो बढ़ गई
आलू,प्याज के दाम अब न पूछो
अपनी थाली छोटी करने की सोचो
राशन की दुकानें भरी पड़ी है
पर मंडी में मंदी बड़ी है
डीज़ल, पेट्रोल मिलकर रुलाये
भरी जैबों में सेंध लगाए
कहती है सरकार हमने नाममात्र महंगाई बढ़ाई है
हमसे से भी तो पूछो हम पर क्या आफत ढ़ाई है
बजट में हुआ अब दुगना इज़ाफ़ा
महंगाई छोड़ रही है हाथों में हमारे खाली लिफाफ़ा
स्वरचित एवं मौलिक
सुनीता कुमारी अहरी
