मजदूर हूं मजबूर नही 
करता हूं मेहनत जी हजूरी नही ,,,,
अपने हाथो पे बस भरोसा 
किस्मत तो मेरी रंगीन नहीं ,,,,
लाखों के मैं महल बनाऊँ
मेरे लिए माना  कोई घर नहीं ,,,,
करो न गुरूर अपनी दौलत पर
सोचना तुम कैसे होते ,होते हम नहीं,,,
देश से लेकर दुनियां तक हम हैं
हीरा भी न निकलता खोदते हम नही,,,
अपनी दुनियां में कुछ जगह रखो 
रुकते सारे काम , करते काम गर हम नहीं,,
रेणु सिंह राधे
कोटा राजस्थान
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