जन्म लेता नही स्वयं वर्तमान में चुनौती इतिहास निर्माता।।
काल से जूझता काल को विवश
करता स्वयं का पथ पथिक बनने को
परिभाषित करने नव युग चेतना जागरण, जागृती सिद्धान्त।।
मालवा का मालवीय निश्चय दृढ़ ठान लिया जो प्राप्त किया युग जीवनसंघर्ष मूल्यों आचार व्यवहार पुरष्कार।।
वक्ता ,बैरिस्टर ,पत्रकार राष्ट्रस्वाभिमान पराक्रम पुरुषार्थ त्याग ,तपस्या ,मनीषी सिद्ध सिद्धांत महा मानव महामना गौरव गाथा काल प्रबाह।।
सबसे बड़ा भिखारी भिक्षा भी मांगा शिक्षा की अलख नव चेतनाजगाने को द्वंद, द्वेष से विमुख उद्देश्यों पथ का पथिक निर्विकार निर्विवादनिर्विघ्न।।
उद्देश्य यज्ञ पथ पर केंद्रित मद मोह से विरक्त बैरागी ब्रह्म सनातन यथार्त का पराक्रम प्रकाश।।
काशी वाराणसी बाबा भोले नाथ
महादेव विश्वास का मदन हिन्दू
हिंदी हिंदुस्तान की गर्जना गूंज
गान मान अभिमान।।
विश्व व्यक्ति व्यक्तित्व विश्व भारत मे स्थापित करने का संकल्पशिक्षा शक्ति अस्त्र शस्त्र सिख का शंखनाद।।
वीरता ,धीरता ,धैर्य, धीर, मर्म धर्म मर्मज्ञ धर्म युद्ध की व्यख्या आख्या विजेता ज्ञान मान भान।।
जन जन का आकर्षण महिमा
महत्व का मोहन युग महक की
गूंज अनुगूँज भारत का सपूत
वर्त्तमान का अभिमन।।
नांदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश
