भागदौड़ की ज़िंदगी है,
जीना इतना आसान नहीं,
सुबह से शाम तक देखो,
किसी को आराम नहीं।
कहीं कमाने की होड़ लगी,
कहीं मजबूरी की दौड़ लगी,
हर पहर हर घड़ी बस सबको,
खाने का भी अब ध्यान नहीं,
भागदौड़ की ज़िंदगी है,
जीना इतना आसान नहीं।
जाने कब संतुष्टि आएगी,
जाने कब चिंता हट पाएगी,
जाने कब सब मिल बैठेंगे,
किस दिन होगा कोई काम नहीं,
भागदौड़ की ज़िंदगी है,
जीना इतना आसान नहीं।
पूजा पीहू
