पापा की प्यारी परी,

नन्हे नन्हे कदमों से घर
आंगन को सजाती
चांद सा चेहरा लिए
मीठी मुस्कान से, मेरी
बगिया को खिलाती …
हाथ पकड़ चलना,
मैंने उसे सिखाया
हर ख्वाहिशों को, उसने मुझसे
पूरा है करवाया..
हो चली है अब बड़ी,
थोड़ी सी नादान, थोड़ी है भोली
मेरे आंगन की
प्यारी सी चिड़िया
अब पराई हो चली…
दूर नहीं मैं तुझसे,
साथ हूं तेरे
है शुभ आशीष सदा,
ससुराल की शोभा, तुम बनना
मान सभी का बनना
रिश्ते नाते संजोकर तुम सदा रखना..
जीवन में अपने ,
कर्तव्यों को पूरा तुम करना
मेरी प्यारी परी,
मेरा गुमान तुम बनना…
मंजू रात्रे
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