भारत मे हर उस स्त्री का
होता है बलात्कार 
जिस पर अरेंज मैरीज के नाम पर
होता आया है अत्यचार 
उस स्त्री की सौंप दिया जाता है
एक ऐसे पुरुष के हाथो मे
जिसे उसने कभी देखा तक नही था
और पहली ही मुलाकात मे
उसे लिटा दिया जाता है 
एक ऐसे इन्सान के बिस्तर पर
जिसे उसने कभी चाहा ही नही
और उसका पति परमेश्वर 
भूखे भेडिये की तरह
टूट पड़ता है उस पर
नोचने को उसके जिस्म को
उस वक़्त हो रहा होता है बलात्कार
एक स्त्री का, समाज की मर्जी से
और पूरा समाज बैंड बजे के साथ 
मनाता है खुशियाँ
एक स्त्री के बलात्कार की
क्या कभी किसी ने पूछा है
किसी स्त्री से उसके मन के भाव 
क्या गुजरी उसके मन पर
जब हुआ था बलात्कार
और जिसे सुहागरात का
दे दिया गया था नाम
उस रात आँखो मे आँसू भर
कैसे उसने गुजारी थी रात
और एक अंजान के हाथो
किया गया था उसे शर्मसार
और केवल एक बार नही
एक पति नाम के प्राणी ने
उसकी मर्जी के खिलाफ 
ना जाने कितनी बार
किया उसका बलात्कार
कविता गुज्जर
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