अक्सर बंद खिड़की के पीछे से एक चीख़ सुनाई देती है
“कहराती हुई आवाज न जाने कितनों का दिल चीरा करती थी।।
तमाशबीन बनकर लोग अक्सर तमाशा देखते थे,,,
इनका तो ये रोज का है “ये आपस मे कहा करते थे।।
सुबह होते ही उसके घर मे ताका-झाकी शुरू हो जाती,
रात में पतिदेव क्यों नाराज थे !!
ये अक्सर लोग उससे पूछते थे।।
वो अथाह दर्द को अपने सीने में छुपा लेती थी,
छुठी मुस्कान को चेहरे पे सज़ा लेती थी,
लेकिन अपने घर का हाल वो,
किसी से नही कहती थी।।
इस बात का जवाब इतने सालों में वो भी कहा जान पाई थी,
किस गलती की सजा यू
रोज़ उसे किस्तो में मिलती है ,
वो भी ये बात कहा जान पाई थी।।
कई लोग उसके पक्ष में रहकर उसके किस्मत को दोष देते थे,
तो कई बिना मुकदमा के ही,
अपना फैसला सुना देते थे,,
जरुर कमी इसके अंदर ही होगी!!
बिना कारण पति हाथ तो उठाता नही होगा..।।
जिसके कारण वो अपने सब रिश्ते छोड़कर आई थी
आज उसका ये रूप देखकर
जार-जार वो रोई थी।।
किस्से कहती दुख वो अपना,
किसे बताती अपने मन की बात ,
बैरी पिया के अवगुणो का,
कैसे करती वो बखान।।
