सुहाग की सेज पर आँखो में ढेरो ,
अरमान लिए सहमी सी मैं बैठी थी,,,
कैसी होगी पहली मुलाकात उनसे
मैं, इन्ही ख्यालो में खोई थी।।
दिल की बढती रफ़्तार मुझे ,
उनके आने की गवाही  दे रही थी,,,,
शर्म से झुकी पलके अटखेलियां मुझे खेल रही थी।।
अपनी कसमकश में मैं ये भूली बैठी थी,,,,
सामने खड़ा शख्स न जाने देर से मुझे देख रहा था।।।
उनकी नजरे मुझपर है ये मैं बखूबी जानती थी,
फिर भी न जाने क्यों!!
 मुझे अंजान बनाने में मज़ा आ रहा था,,,
प्रेम की नई शुरुआत थी कुछ अनकहे जज़्बात थे, 
जब बड़े प्यार से उन्होने मेरा हाथ थामा था।।
शायद वो कहना कुछ चाहते थे ,
लेकिन कह नही पा रहे थे,
मेरे करीब बैठक उन्होंने मेरा घूघट उठाया था,
मेरे हमनवां को मैंने अपने करीब पाया था।।
रूप देख उनका मैं गर्व से मुस्कुराई थी,
पिया है फौजी मेरे ये जानकर सुख मै पाई थी।।
तन पर वर्दी साजे वो मेरे सामने बैठे थे,
मैं अल्हड नादान इतना भी न समंझ पाई थी,
 माँ भारती का बुलावा आया है,,,
वो यही बताने आये थे।।
दर्द का सैलाब लिए बस मैंने भी पलके झुका दी थी,
खामोश लबो पर मैंने भी झुठी मुस्कान सजाई थी।।
आँखो में भरे आँसू बहने को बेताब थे,
न जाने कैसे मैंने अपने अश्को को रोका था।।
जल्दी आना मैं इन्तज़ार करूंगी बस इतना  ही कह पाई,
  नम आंखों से जब उन्होंने मुझको हृदय से लगाया था।।
आँखो में मिलने की आस लिए मैंने भी कर्तब्य निभाया था
हु मैं अपने फौजी की फ़ौजन
 मैंने अपने आप को बतलाया था,,।।
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