जब ये लब कुछ भी न कह पाये 
तब इनकी जबानी तुम पढ़ लेना।
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बालों में अनुभव की चांदी छाये
तो इनकी कहानी तुम पढ़ लेना।
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कहीं धूप,कहीं छाँव से बीते दिन 
एक शाम सुहानी तुम पढ़ लेना।
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मेरी बचकानी बातें याद करो तो 
इनमें छुपी गहराई तुम पढ़ लेना।
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ये शब्द नहीं सब बयां कर सकते
कभी ख़ामोशी भी तुम पढ़ लेना।
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जुड़ने टूटने के सिलसिले बहुत हुए
इस ठहराव को बस तुम पढ़ लेना।
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तय न कर पायी जो दूरियां कभी
वो लंबी मज़बूर राहें तुम पढ़ लेना।
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दुनिया मांगेगी हर चीज का हिसाब
खोया पाया कितना तुम पढ़ लेना।
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बारिश की बूंदों संग बहेगा हर बार
मेरी आँखों का पानी तुम पढ़ लेना।
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 दुनिया की भीड़ में गुम हो जाऊ 
तो प्रेम की निशानी तुम पढ़ लेना।
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दिल के खत्म होते बेज़ार किस्से में
इक ‘आस’ की चाह तुम पढ़ लेना।
स्वरचित
शैली भागवत “आस”✍️
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