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कई साल बीत गए,पर हर दिन जब भी मैं आईने के सामने खड़ी होती हूँ, तुम्हारी याद बिना वजह ही आ जाती है।मैं कतई नही चाहती कि तुम कभी भी याद आओ लेकिन तुम्हारे कहे शब्द अक्सर मुझे तुम्हारी याद दिला जाते है। तुमने कहा था जब भी आईना देखो तो मुझे याद रखना…..ये तुम्हारे गले में काला तिल है न….ये मैं हूँ…अब बोलो कभी भुला पाओगी मुझे?
तुम चले गए,समय बदले ज़माना हो गया,कोई कारण भी नही तुम्हे याद करने का…फिर भी …..जब भी आईने के सामने खड़ी होती हूँ तो…..तुम्हारी ये प्रेम की निशानी दिख जाती है।मुझे ही क्यो ,अक्सर गले के मेरे इस तिल को देखते हुए कहते है….ये बहुत सुंदर है,मेरे चेहरे पे मीठी मुस्कान आ जाती है।किसे क्या कहूं…. लोगो के पास बहुत कुछ होता होगा पर मेरे साथ तो तुम न होते हुए भी मेरे पास 24 घण्टे मौजूद हो।
श्रद्धा निगम
बाँदा उप
