एक खुश इंसान के क्या लक्षण होते हैं ?
इसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा तो नहीं।
फिर भी एक प्रसन्न व्यक्ति में गुण मिलते।
जिसे किसी यंत्र से जा सकता नापा नहीं।
पूर्व में रचे प्रसन्न व्यक्ति के लक्षण भाग 1।
अब पढ़ें उसका भाग 2 पहले पढ़े भाग 1।
प्रसन्न व्यक्ति हरेक कार्य उत्साह से करता।
वह जोभी करता सृजनात्मकता से करता।
वह अपने कृत कर्म को ही योग मानता है।
सेवा में जीवन का सर्वोत्तम धर्म मानता है।
1 प्रसन्न व्यक्ति जीवन के विभिन्न आयामों।
शारीरिक मानसिक भावनात्मक आयामों।
आध्यात्मिक पारिवारिक और सामाजिक।
व व्यावसायिक आयामों में संतुलन रखता।
सामान्यतया वह शान्त प्रकृति का रहता है।
आवेश क्रोध चिन्ता घृणा से दूर ये रहता है।
हीनता भय आदि नकारात्मक भावों से दूर।
हमेशा रहता जीवन में इससे मुक्त रहता है।
एक प्रसन्न व्यक्ति सदैव आशावादी होता है।
निराशा-अवसाद कभी भी न हावी होता है।
वह स्वयं में एवं दूसरों में भी गुण देखता है।
उसे स्वयं में व दूसरे में भी विश्वास होता है।
वह किसी की न्यूनतम आलोचना करता है।
आदर्श मात्रा में ही दूजे की प्रशंसा करता है।
प्रसन्न व्यक्ति जीवन में सदा सहज रहता है।
वह कभी भी बनावटी कृतिम नहीं रहता है।
तनाव पर नियंत्रण हेतु सदैव प्रयत्न करता।
इसके प्रबंधन हेतु भी निरंतर प्रयत्न करता।
जीवन स्थिर-शांतिपूर्ण बनाने का करे यत्न।
मन भटके न और न अस्थिर हो करे प्रयत्न।
वह अपने व दूसरों के चेहरों पर मुस्कराहटें।
पैदा करने की हर संभव कोशिस करता है।
मुस्कुराहटों को वह आस-पास बिखेरता है।
किसी के चेहरे पे आँसू देख उन्हें पोछता है।
छोटी-छोटी बातों से ना तो परेशान होता है।
ना ही किसी और को वह परेशान करता है।
आप भी ऐसे ही हैं न ? मुझको है विश्वास।
इसीलिए कविता लिखके करता हूँ मैं आस।
इस रचना का उद्देश्य आपको प्रसन्न रखना।
व दूसरों को प्रसन्न रखने में सहायक बनना।
रचयिता :
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
